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शरीर के सफेद दाग का देशी उपचार / Safed daag ka deshi upchar / Leucoderma ka deshi upchar

यह रोग संक्रामक नहीं है। इसमें केवल त्वचा का रंग ही सफेद होता है। धूप में रहने से हमारी त्वचा पर मेलानिन नामक पिगमेंट का बनना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। कभी-कभी आंतरिक मनोवैज्ञानिक कारणों से भी मेलानिन का उत्पादन बढ़ जाता है या मेलानिन त्वचा की भीतरी सतह से बाहरी सतह पर आ जाता है।

 

मेलानिन त्वचा पर अनियमित तरीके से फैलता हुआ कहीं-कहीं काले दाग छोड़ता जाता है। इन काले धब्बों से बचने के लिए सबसे पहली जरूरत है, तेज धूप से बचाव। सूर्य की रेडिएसन से समस्या ज्यादा गंभीर हो जाती है, इसलिए इलाज के तौर पर धूप में जाने से परहेज करना चाहिए।
जब मेलानिन त्वचा पर नहीं पहुँच पाता तो सफेद पैच या ‘विटिलिगो’ हो जाता है। सफेद पैच मिटाने के लिए पैचों को धूप में अधिक से अधिक समय तक रखना चाहिए।

त्वचा के सफेद दाग के नाम :- स्मनबव. श्वेत, क्मतउं. चर्म, स्मनबवकमतउं- 


इस रोग को अभी तक बड़ी कठिनता से ठीक होता देखा गया है। रोगी व चिकित्सक दोनों धैर्य से लम्बे समय तक चिकित्सा करते रहें तो ठीक हो जाता है। चिकित्सा के मध्य धब्बों या दागों में छोटे-छोटे काले निषान पैदा होते हैं, ये काले निषान फैलते जाते हैं, और त्वचा का रंग सामान्य हो जाता है, सफेदी दूर हो जाती है। इस तरह यह ठीक हो जाता है। यह रोग संक्रामक नहीं है। इसमें केवल त्वचा का रंग ही सफेद होता है।




सफेद दाग होने का कारण :-

Safed Daag Kyo Hote Hai? सफेद दाग क्यों होते हैं ?
अभी तक सही कारणों का पता नहीं लगा है। फिर भी निम्न कारण या शरीर पर इनसे पडे़ दुष्प्रभावों से सफेद दाग होते हैं, या फिर तेजी से बढ़ते हैं:- क्षय जन्य धातु, वंषानुगत, उपदंष, चोट, जलना, कान, दाँत, गले का खराब रहना, पुराना कब्ज, कृमि, पुरानी पेचिष, पसीना ठीक तरह न निकलना, अत्यधिक मानसिक चिन्तायें, कमर पर तंग कपड़े पहनना, खान-पान की अनियमितता, भोजन ठीक तरह न पचना, यकृत के कार्य कमजोर होना, पीलिया, आमाषय के विकार, आन्त्रिक ज्वर जैसे रोग जिनका आमाषय और आँतों पर प्रभाव पड़ता है, चर्म में मेलानिन की मात्रा कम हो जाती है तो त्वचा का रंग सफेद हो जाता है, तथा माँसाहार। 




सफेद दाग के लक्षण :-
सफेद दाग (Safed Daag) शरीर में कहीं भी हो सकते हैं। आरम्भ में हाथों, कोहनी, चेहरा, टखने, पैर और जो अंग दबाव से ग्रस्त जैसे कमर में नाड़ा बाँधने की जगह आदि स्थानों पर सफेद दाग होते हैं। धीरे-धीरे धब्बे एक - दूसरे से मिलते हुए सारे शरीर पर फैल जाते हैं। इन धब्बों से शरीर में किसी प्रकार की पीड़ा नहीं होती। इसलिए रोगी इनकी चिकित्सा की ओर छोटा-सा सफेद दाग होते ही ध्यान नहीं देता। जब अँगुलियों की नोंकें, हथेली, तलवे, होंठ आदि सफेद हो जाते हैं तो ऐसे रोगियों की चिकित्सा करने में लम्बा समय लगता है तथा सारे अंग सफेद होने के पश्चात् ठीक होने की सम्भावना बहुत कम होती है। जब धब्बे आरम्भ ही हुए हों, 2-3 इंच तक फैले हों, चिकित्सा करने से ठीक हो जाते हैं। सफेद दाग (Leucoderma) के अनेक रोगियों की चिकित्सा करते समय मैंने देखा है कि इनकी चिकित्सा करने से कुछ धब्बे ठीक हो जाते हैं तो कुछ नये भी निकल आते हैं।
इनकी चिकित्सा में एक-दो साल प्रायः लग जाते हैं। औषधि -जगत में होम्योपैथिक चिकित्सा से यह दूर हो जाता है।
आन्तरिक सेवन- अनार के पत्तों को छाया में सुखाकर बारीक पीस कर कपड़े  से छान लें। 8.8 ग्राम प्रातः व शाम को नित्य ताजा पानी से फँकी लें।


सफेद दाग के घरेलू उपाय :-

छाछ- छाछ पीना सफेद दागों में उपयोगी है। यह दो बार नित्य पीयें।

उड़द- उड़द को पानी में भिगोकर, पीसकर सफेद दागों पर चार महीने लेप करने से सफेद दाग मिट जायेंगे।

अखरोट- अखरोट में ऐसा विषैला प्रभाव होता है कि अखरोट के पेड़ की जड़ो के पास की मिट्टी काली हो जाती है। पढ़ने में ऐसे उल्लेख मिले हैं कि अखरोट खाते रहने से सफेद दाग ठीक हो जाते हैं।

नीम- नीम की पत्ती, फूल, निबोली सब सूखे हुए समान मात्रा में लेकर पीस लें और प्रतिदिन एक चम्मच फँकी लें। मावली बापची पीस कर सुबह-षाम आधा चम्मच ठंडे पानी से फँकी लें।

रिजका- सौ ग्राम रिजका और सौ ग्राम ककड़ी का रस मिलाकर पीने से सफेद दाग ठीक हो जाते हैं। नित्य सुबह-षाम दो बार कुछ महीनों तक पीयें।

लहसुन- लहसुन के रस में हरड़ घिसकर लेप करते रहने से सफेद दाग मिट जाते हैं। लहसुन का आन्तरिक सेवन भी लाभदायक है।

बथुआ- नित्य बथुआ उबालकर निचोड़ कर इसका रस पीयें तथा सब्जी खायें। बथुए के उबले पानी से चर्म को धोयें। बथुए के कच्चे पत्ते पीसकर निचोड़ कर रस निकाल लें। दो कप रस में आधा कप तिल का तेल मिलाकर मंद-मंद आग पर गर्म करें। जब रस जलकर तेल ही रह जाये तो छान कर शीषी भर लें तथा नितय सफेद दागों पर लगायें। लम्बे समय तक लगाते रहें, लाभ होगा।

अदरक- अदरक का रस 30 ग्राम और बापची 15 ग्राम दोनों को मिलाकर भिगोयें। जब अदरक का रस व बापची दोनों सूख जाये तो इन दोनों के बराबर अर्थात् 45 ग्राम चीनी मिलाकर पीस लें। इसकी एक चम्मच की फँकी ठंडे पानी से एक बार नित्य प्रातः खाना खाने के एक घंटे बाद लें। बापची का तेल लगाने से कभी-कभी किसी-किसी रोगी के फफोले हो जाते हैं, घाव हो जाता है। अतः पूर्ण सावधानी से लगायें। तनिक भी कष्ट होता प्रतीत हो तो बापची का तेल नहीं लगायें। आरम्भ में एक जगह आधा इंच जगह में चार दिन लगा कर देखें। यदि इस जगह कोई प्रतिक्रिया नहीं हो तो सभी सफेद धब्बों पर लगायें। आरम्भिक अवस्था में 5 महीने में ही धब्बे मिट जाते हैं।

हल्दी- 125 ग्राम पिसी हुई हल्दी को पाँच सौ ग्राम स्प्रिट में मिलाकर षीषी में कार्क लगाकर धूप में रख दें। दिन में तीन बार जोर से हिलायें। तीन दिन बाद छानकर फिर षीषी में भर लें। यह हल्दी का टिंचर है। इसे नितय तीन बार सफेद दागों पर लगाने से लाभ होगा। एक चम्मच हल्दी सुबह-षाम दो बार गर्म दूध से लगातार छः महीने फँकी लें। सफेद दागों में लाभदायक है।

चना- मुट्ठी भर काले चने और दस ग्राम त्रिफला चूर्ण (हरड़, बहेड़ा, आँवला) 125 ग्राम पानी में भिगों दें। 12 घण्टे बाद इन चनों को मोटे कपड़े में बाँध दें तथा बचा हुआ पानी कपडे़ की पोटली पर डाल दें। फिर 24 घण्टे बाद पोटली खोलें । इस प्रकार इनमें अंकुर निकल आयेंगे। कहने का तात्पर्य है, चने अंकुरित कर लें। यदि किसी मौसम में अंकुर न निकलें तो ऐसे ही खा लें। इस प्रकार अंकुरित चने चबा-चबाकर लगातार 6 सप्ताह खाने से सफेद दाग दूर हो जाते हं।

नमक- सफेद दागों (Safeed) की चिकित्सा-समय में नमक का परित्याग करें तो शीघ्रता से लाभ होता है। चने के आटे की रोटी बिना नमक की लम्बे समय कई महीनों तक खायें। इसे ताजा देषी घी से चुपड़ कर घी डालकर खा सकते हैं। चने की दाल खायें। बिना नमक की चने की रोटी खाते रहने से ही बिना किसी औषधि की सहायता से रोगी ठीक हो सकता है। यदि लम्बे समय तक केवल चने की रोटी खाना रोगी के लिए कठिन हो तो गेहूँ और चना दोनों समान मात्रा में मिलाकर सेंधा नमक डालकर रोटी खायें। चने की दाल की तरह कभी-कभी बिना धुली मूँग की दाल ले सकते हैं। अन्य सब्जियों में पालक, गाजर, परवल, अल्प मात्रा में आलू ले सकते हैं। कैल्षियम युक्त भोजन और विटामिन-डी का प्रयोग लाभदायक है। धूप में विटामिन-डी मिलता है। सफेद दागों के रोगी के लिए धूप हितकर है।


परहेज-

खट्टी चीजें, माँस, विषेश कर मछली, चावल, नमक, तेल, गुड़, मिर्च न खायें। खाने के साथ-साथ लगााने के लिए भी निम्न में से कोई एक निरन्तर लम्बे समय तक लगााते रहना चाहिए।